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 अयोध्या, उत्तर प्रदेश  •  संपूर्ण Topic Hub

श्री राम जन्मभूमि अयोध्या राम मंदिर

500 साल का इतिहास, निर्माण, राम लला, दर्शन, आरती, Gallery, Hotel गाइड और FAQs — सब एक ही जगह

70एकड़ क्षेत्र
161 फ़ीटऊँचाई
22 Jan 2024प्राण प्रतिष्ठा
500+वर्षों का संघर्ष
2.5 लाख+ पाठक
4.9/5 रेटिंग
~15 मिनट पढ़ने में
जून 2026 अपडेट
E-E-A-T Verified
संपूर्ण Topic Hub अयोध्या, उत्तर प्रदेश दिलीप कुमार तीर्थ यात्रा
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दर्शन समय
प्रातः 6:00 – रात्रि 10:00
सभी दिन खुला
मंगला आरती
प्रातः 6:00 बजे
प्रतिदिन
शयन आरती
रात्रि 9:30 बजे
प्रतिदिन
प्रवेश शुल्क
निःशुल्क
सभी के लिए
निकटतम रेलवे
अयोध्या धाम जंक्शन
~1.5 किमी दूरी
परिचय

राम मंदिर — सनातन आस्था का सर्वोच्च केंद्र

अयोध्या में निर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं — यह करोड़ों हिंदुओं की सदियों पुरानी आस्था, संघर्ष और विजय का अमर प्रतीक है। जहाँ मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ, उसी पावन भूमि पर आज यह भव्य मंदिर स्थापित है।

सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या नगरी सनातन धर्म की सबसे पवित्र सप्तपुरियों में प्रथम है — अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, काञ्ची, अवंतिका और द्वारका। यहाँ भगवान श्रीराम ने जन्म लिया, लीलाएं कीं, और करोड़ों भक्तों के हृदय में सदा के लिए वास किया।

राम जन्मभूमिः पुण्यभूमिः सर्वमंगला।
यत्र जातो दशरथसुतो राघवः परमेश्वरः॥

— वाल्मीकि रामायण
अर्थ: वह पुण्यभूमि अयोध्या सर्वमंगलकारी है, जहाँ महाराज दशरथ के पुत्र, परमेश्वर श्रीराम का जन्म हुआ।

22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से इस भव्य मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई — पुष्य नक्षत्र के शुभ अवसर पर। यह क्षण न केवल भारत, बल्कि समस्त विश्व के हिंदुओं के लिए एक युगांतकारी पल था।

इतिहास

500 वर्षों का संघर्ष — राम मंदिर की ऐतिहासिक यात्रा

राम जन्मभूमि का इतिहास संघर्ष, विश्वास और अंततः विजय की एक लंबी महागाथा है। सदियों तक चले इस संघर्ष में लाखों लोगों ने अपना योगदान दिया, तब जाकर आज यह मंदिर खड़ा हो सका।

1528

बाबरी संरचना का निर्माण

मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने उस स्थान पर एक संरचना बनवाई जिसे हिंदू श्रीराम की जन्मभूमि मानते थे। तभी से यह विवाद प्रारंभ हुआ।

1853

प्रथम सांप्रदायिक संघर्ष

अयोध्या में पहली बार सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ। 1859 में ब्रिटिश सरकार ने परिसर को आंतरिक और बाह्य भागों में विभाजित किया।

1949

मूर्तियों का प्रकाट्य

23 दिसंबर 1949 को विवादित ढाँचे के भीतर श्रीराम की मूर्तियाँ प्रकट हुईं। न्यायालय के आदेश से परिसर में ताला लगा दिया गया।

1986

ताला खुला — दर्शन पुनः प्रारंभ

फैज़ाबाद जिला न्यायाधीश के आदेश से 1986 में परिसर का ताला खोला गया और हिंदुओं को दर्शन-पूजन का अधिकार प्राप्त हुआ।

1992

विवादित ढाँचे का विध्वंस

6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों द्वारा विवादित ढाँचा ध्वस्त किया गया। इस घटना ने देशभर में व्यापक प्रभाव डाला।

2019

सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से राम जन्मभूमि पर हिंदुओं का अधिकार स्वीकार किया।

2020

भूमि पूजन

5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण हेतु ऐतिहासिक भूमि पूजन किया।

2024

प्राण प्रतिष्ठा — राम आए घर

22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। समस्त भारत दीपमाला से जगमगा उठा।

निर्माण

मंदिर निर्माण — एक दिव्य यज्ञ

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधीन इस महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा और उनके पुत्रों द्वारा डिज़ाइन किया गया यह मंदिर नागर शैली में निर्मित है।

🏗️ निर्माण में उपयोग की गई सामग्री

मंदिर में एक भी लोहे की छड़ या सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया। राजस्थान के मकराना और बंसी पहाड़पुर के श्वेत व गुलाबी पत्थरों से यह मंदिर निर्मित है। भूमि के नीचे 14 मीटर गहराई तक 47 परतों में रोलर-कॉम्पैक्टेड कंक्रीट डाली गई। माना जाता है यह मंदिर 1000 वर्षों तक अविचल खड़ा रहेगा।

मंदिर परिसर में कुल 5 मंडप हैं — कुडु मंडप, नृत्य मंडप, रंग मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप। परिसर में 14 देवताओं के मंदिर निर्मित किए जा रहे हैं।

"यह मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं — यह भारत की अटूट आस्था, 500 वर्षों के संघर्ष और अनगिनत बलिदानों का साकार रूप है।"
स्थापत्य

मंदिर की भव्य वास्तुकला और संरचना

📐

आयाम

लंबाई 380 फीट (पूर्व-पश्चिम), चौड़ाई 250 फीट, ऊँचाई 161 फीट। तीन मंजिला भव्य संरचना।

🏛️

नागर शैली

प्राचीन भारतीय मंदिर स्थापत्य की नागर शैली। 392 खंभे और 44 दरवाजे — सभी हस्तनिर्मित।

🔔

तीन मंजिला

प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई 20 फीट। भूतल पर श्री रामलला विराजित, ऊपरी मंजिलों पर गर्भगृह।

🌿

हरित परिसर

70 एकड़ में 70% हरियाली। जलकुंड, सीता रसोई, ऋषि वाटिका, और राम कथा पार्क बन रहे हैं।

⛩️

14 देव मंदिर

मुख्य मंदिर के साथ सूर्य, गणेश, शिव-पार्वती, दुर्गा और हनुमान जी के मंदिर निर्मित होंगे।

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कुबेर टीला

परिसर में प्राचीन कुबेर टीला जहाँ भगवान शिव का मंदिर स्थापित है और पुरातात्विक अवशेष संरक्षित।

मंदिर में उपयोग की गई प्रमुख विशेषताएँ

राम लला

श्री राम लला की दिव्य मूर्ति — हृदयस्पर्शी दर्शन

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श्री रामलला विराजमान

मंदिर के गर्भगृह में विराजित श्री रामलला की दिव्य मूर्ति कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा निर्मित है। 51 इंच ऊँची यह मूर्ति श्यामवर्ण शालिग्राम पत्थर से बनाई गई है और बालक राम का पाँच वर्षीय मनोरम रूप प्रदर्शित करती है।

51 इंच ऊँचाई शालिग्राम पत्थर बाल राम रूप अरुण योगीराज निर्मित

राम लला की मूर्ति में प्रभु के दाहिने हाथ में धनुष और बाएं हाथ में बाण है। सिर पर मुकुट, शरीर पर पीताम्बर वस्त्र और चरणों में पादुकाएँ — यह स्वरूप अद्वितीय और मनोमुग्धकारी है।

🌼 रामलला का दैनिक श्रृंगार

प्रतिदिन प्रातः श्रृंगार आरती के समय राम लला को विभिन्न वस्त्र, फूलमाला और आभूषणों से अलंकृत किया जाता है। प्रत्येक दिन का पहनावा भिन्न-भिन्न होता है। विशेष अवसरों पर सोने-चाँदी के आभूषणों से विशेष श्रृंगार होता है।

दर्शन गाइड

दर्शन समय और 5 आरतियों की समय-सारणी

श्री राम मंदिर में प्रतिदिन पाँच आरतियाँ होती हैं। भक्त सूर्योदय से देर रात तक दर्शन कर सकते हैं। नीचे संपूर्ण समय-सारणी दी गई है:

आरती / दर्शनसमयविवरणस्थिति
🌅 मंगला आरतीप्रातः 6:00 बजेप्रभु का प्रातःकालीन जागरण✓ प्रतिदिन
🌸 श्रृंगार आरतीप्रातः 8:00 बजेश्रीराम का श्रृंगार एवं भोग✓ प्रतिदिन
☀️ भोग आरतीदोपहर 12:00 बजेमध्याह्न भोग✓ प्रतिदिन
🌇 संध्या आरतीसायं 7:00 बजेशाम की महाआरती★ विशेष
🌙 शयन आरतीरात्रि 9:30 बजेप्रभु का शयन✓ प्रतिदिन
🚪 मंदिर बंदरात्रि 10:00 बजेनित्य
📅 विशेष दर्शनराम नवमी / जन्माष्टमी24 घंटे खुला रहता है★ विशेष अवसर

💡 सबसे अच्छा दर्शन कब करें?

सुबह 6-8 बजे के बीच भीड़ सबसे कम होती है और दर्शन शांति से होते हैं। संध्या आरती (7 PM) देखना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है — इस समय मंदिर की सजावट और आरती का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है।

प्रवेश नियम

मंदिर प्रवेश के नियम और जरूरी बातें

✅ अनुमत वस्तुएँ

❌ प्रतिबंधित वस्तुएँ

🔒 लॉकर सुविधा

मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर निःशुल्क लॉकर उपलब्ध हैं। मोबाइल, बैग और जूते-चप्पल यहाँ सुरक्षित रख सकते हैं। लॉकर टोकन अवश्य संभाल कर रखें।

यात्रा गाइड

अयोध्या कैसे पहुँचें — संपूर्ण यात्रा मार्गदर्शन

अयोध्या देश के हर कोने से रेल, वायु और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। नीचे तीनों माध्यमों की विस्तृत जानकारी दी गई है:

✈️

वायु मार्ग

महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा — दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु से सीधी उड़ानें। हवाई अड्डे से मंदिर लगभग 10 किमी (30 मिनट)।

🚂

रेल मार्ग

अयोध्या धाम जंक्शन — मुख्य मंदिर से मात्र 1.5 किमी। दिल्ली, वाराणसी, लखनऊ से सैकड़ों ट्रेनें। रामायण एक्सप्रेस सबसे लोकप्रिय।

🚌

सड़क मार्ग

लखनऊ से 135 किमी (2 घंटे)। वाराणसी से 210 किमी (3.5 घंटे)। प्रयागराज से 165 किमी। UP Roadways की बसें नियमित।

🛺

स्थानीय यातायात

स्टेशन से मंदिर तक ई-रिक्शा, ऑटो और टैम्पो उपलब्ध। मंदिर परिसर के पास निःशुल्क पार्किंग। पैदल दूरी भी संभव।

ठहरने की जगह

अयोध्या में निकटतम होटल और ठहरने की सुविधाएँ

अयोध्या में राम मंदिर के पास बजट से लेकर लक्जरी तक सभी श्रेणियों के होटल और धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं:

⭐⭐⭐⭐⭐

Taj Ayodhya (Sarovar Premiere)

मंदिर से 3 किमी। विश्व स्तरीय सुविधाएँ, रेस्टोरेंट, स्पा। ₹5,000–12,000/रात

लक्जरी
⭐⭐⭐⭐

Hotel Ramayan

मंदिर से 1 किमी। स्वच्छ कमरे, शाकाहारी भोजन, दर्शन पैकेज। ₹1,500–3,500/रात

बजट फ्रेंडली
⭐⭐⭐

IRCTC Yatri Niwas

रेलवे स्टेशन परिसर में। सस्ती और सुरक्षित। ऑनलाइन बुकिंग IRCTC से। ₹500–1,200/रात

सरकारी
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Ram Janmabhoomi Dharamshala

ट्रस्ट द्वारा संचालित। तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत किफायती। ₹100–400/रात

धर्मशाला
⭐⭐⭐

Hotel Siddharth Ayodhya

मंदिर से 800 मीटर। AC/Non-AC दोनों। शाकाहारी रेस्टोरेंट। ₹800–2,000/रात

मध्यम बजट
🏠

Airbnb / Homestays

अयोध्या में होमस्टे उपलब्ध। स्थानीय अनुभव, घर का खाना। ₹600–2,500/रात

Unique Stay

💡 बुकिंग टिप्स

राम नवमी, दीपोत्सव और जन्माष्टमी के समय 3–6 महीने पहले बुकिंग करें। इन अवसरों पर लाखों श्रद्धालु आते हैं और होटल पूरी तरह भर जाते हैं। लखनऊ में रुककर Day Trip भी एक विकल्प है।

दर्शनीय स्थल

अयोध्या के आस-पास के प्रमुख तीर्थ स्थल

🕌

हनुमान गढ़ी

76 सीढ़ियाँ, भव्य मंदिर। 10 वीं सदी में निर्मित। मान्यता है कि बिना हनुमान गढ़ी दर्शन के राम मंदिर की यात्रा अधूरी है।

🌊

सरयू नदी घाट

राम की पैड़ी पर संध्या आरती अद्भुत होती है। दीपोत्सव पर यहाँ लाखों दीपक जलाए जाते हैं।

⛩️

कनक भवन

राजा जनक द्वारा निर्मित — श्रीराम और माता सीता को विवाह उपहार में दिया। मुकुट से सुसज्जित मूर्तियाँ।

🌿

त्रेता का ठाकुर

वाल्मीकि रामायण में उल्लेखित प्राचीन मंदिर। यहाँ राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था।

🏛️

मणि पर्वत

रामायणकालीन टीला जहाँ हनुमान जी ने संजीवनी बूटी रखी थी। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व।

🛕

बिरला मंदिर

आधुनिक और भव्य मंदिर। मंदिर की दीवारों पर रामायण के प्रसंगों का चित्रण।

Latest Updates

राम मंदिर — ताज़ा समाचार और अपडेट 2025

Oct 2025
मंदिर परिसर का विस्तार: 70 एकड़ परिसर में राम कथा पार्क और सीता रसोई का निर्माण कार्य पूरा होने की कगार पर। दर्शनार्थियों के लिए नई सुविधाएँ।
Sep 2025
डिजिटल दर्शन सुविधा: विदेशों में बसे भारतीय भक्तों के लिए ऑनलाइन Live Darshan की सुविधा आरंभ। YouTube और Website दोनों पर उपलब्ध।
Aug 2025
श्रावण मास विशेष: श्रावण महीने में विशेष रुद्राभिषेक और दीपोत्सव का आयोजन। 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
Jun 2025
नया Railway Station: अयोध्या धाम जंक्शन का पुनर्निर्माण पूर्ण। अब अधिक ट्रेनें और बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध।
Apr 2025
राम नवमी 2025: इस वर्ष राम नवमी पर लगभग 50 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मंदिर 24 घंटे खुला रहा। विशेष आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम।
यात्रा टिप्स

अयोध्या यात्रा से पहले यह जरूर पढ़ें

FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर अयोध्या के दर्शन का समय क्या है?
श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक होते हैं। पाँच आरतियाँ — मंगला (6 AM), श्रृंगार (8 AM), भोग (12 PM), संध्या (7 PM) और शयन (9:30 PM) — प्रतिदिन होती हैं। राम नवमी जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर 24 घंटे खुला रहता है।
राम मंदिर में प्रवेश शुल्क कितना है?
श्री राम मंदिर में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है। भारत के सभी नागरिक — किसी भी धर्म, जाति और वर्ग के — बिना किसी शुल्क के दर्शन कर सकते हैं।
अयोध्या कैसे पहुँचें — सबसे अच्छा रास्ता?
रेल मार्ग सबसे सुविधाजनक: अयोध्या धाम जंक्शन मंदिर से केवल 1.5 किमी है। वायु मार्ग: महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा। सड़क मार्ग: लखनऊ (2 घंटे), वाराणसी (3.5 घंटे), प्रयागराज (3 घंटे)।
राम मंदिर में मोबाइल ले जा सकते हैं?
नहीं, मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्टवॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर निःशुल्क लॉकर की सुविधा उपलब्ध है।
राम लला की मूर्ति किसने बनाई?
श्री रामलला की मूर्ति कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई। 51 इंच ऊँची, श्यामवर्ण शालिग्राम पत्थर से निर्मित यह मूर्ति 5 वर्षीय बाल राम को दर्शाती है।
अयोध्या में सबसे अच्छा मौसम कब है?
अक्टूबर से मार्च का मौसम अयोध्या यात्रा के लिए सर्वोत्तम है। तापमान 10–25°C रहता है। राम नवमी (मार्च-अप्रैल) पर भव्य उत्सव होता है परंतु अत्यधिक भीड़ रहती है।
हनुमान गढ़ी और राम मंदिर में क्या संबंध है?
मान्यता है कि हनुमान गढ़ी वह स्थान है जहाँ हनुमान जी श्रीराम की जन्मभूमि की रक्षा करते हुए निवास करते हैं। परंपरा के अनुसार पहले हनुमान गढ़ी के दर्शन करने के बाद राम मंदिर जाना शुभ माना जाता है। दोनों स्थान मात्र 1 किमी की दूरी पर हैं।
राम मंदिर दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें?
सामान्य दर्शन के लिए कोई बुकिंग आवश्यक नहीं है। विशेष VIP दर्शन हेतु shriramjanmbhoomi.com की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। राम नवमी जैसे विशेष अवसरों पर पहले से पंजीकरण उपयोगी होता है।
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संदर्भ स्रोत

आधिकारिक और प्रामाणिक संदर्भ

जय श्री राम 🙏

अयोध्या की पावन धरती पर एक बार अवश्य जाएँ। यह तीर्थ यात्रा आपके जीवन का सबसे पवित्र और अविस्मरणीय अनुभव बनेगी।

"रामायण में रामजी का घर था — आज रामजी के घर में रामायण जी रहे हैं।"

लेख अंतिम बार अपडेट:

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✍️ लेखक एवं संपादक

हनुमान भक्ति संपादकीय टीम

हमारी टीम पिछले 5+ वर्षों से सनातन धर्म, हनुमान भक्ति, तीर्थ यात्रा और वैदिक ज्ञान पर शोधपूर्ण लेख लिखती आई है। सभी लेख प्रामाणिक ग्रंथों और विशेषज्ञ समीक्षा के आधार पर तैयार किए जाते हैं। E-E-A-T (Experience, Expertise, Authoritativeness, Trustworthiness) के सर्वोच्च मानकों का पालन किया जाता है।

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