सम्पूर्ण सुंदरकांड पाठ: हिंदी लिरिक्स और महत्व
गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री रामचरितमानस का पांचवां अध्याय 'सुंदरकांड' हनुमान जी की विजय गाथा है। इसका पाठ करने से जीवन के सभी दुख और क्लेश मिट जाते हैं।
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Download PDF Now॥ मंगलाचरण ॥
शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं।
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्॥
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं।
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुखु कंद मूल फल खाई॥
जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥
यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा। चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा॥
सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥
बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी॥
... (यहाँ बीच की चौपाइयां और दोहे हैं) ...
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान॥
॥ इति सुंदरकांड समाप्त ॥
सुंदरकांड से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
1. सुंदरकांड का पाठ कब करना चाहिए?
सुंदरकांड का पाठ मंगलवार, शनिवार, पूर्णिमा या हनुमान जयंती के दिन करना सबसे फलदायी माना जाता है।
2. सुंदरकांड पाठ के क्या लाभ हैं?
यह आत्मविश्वास बढ़ाता है, मानसिक शांति देता है और घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाता है।
3. क्या रात में सुंदरकांड पढ़ सकते हैं?
हाँ, सुंदरकांड का पाठ रात्रि में करना भी शुभ होता है, विशेषकर हनुमान जी की साधना के लिए।