श्री हनुमान महागाथा: जन्म, वीरता और भक्ति का संपूर्ण इतिहास

"अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्"


1. पावन जन्म और बाल्यकाल

भगवान हनुमान का जन्म त्रेतायुग में अंजनाद्रि पर्वत (वर्तमान किष्किंधा) के समीप हुआ था। माता अंजना और पिता केसरी के घर जन्मे हनुमान जी वास्तव में भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हैं। कथा के अनुसार, जब राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहे थे, तब उस दिव्य खीर का एक भाग पवन देव उड़ाकर माता अंजनी के पास ले गए, जिसे ग्रहण करने के उपरांत चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन बजरंगबली का प्राकट्य हुआ।

बाल्यकाल में ही हनुमान जी अत्यंत तेजस्वी थे। एक बार उन्होंने सूर्य देव को मीठा फल समझकर निगल लिया था, जिसके बाद इंद्र देव ने उन पर वज्र से प्रहार किया। इसी घटना के बाद उन्हें सभी देवताओं ने अद्वितीय शक्तियां प्रदान कीं और उनका नाम 'हनुमान' पड़ा।

2. शिक्षा और सूर्य देव का शिष्यत्व

हनुमान जी ने अपनी शिक्षा सूर्य देव से प्राप्त की। उन्होंने मात्र कुछ ही दिनों में समस्त वेदों और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लिया। सूर्य देव के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उन्होंने सूर्य पुत्र सुग्रीव की रक्षा और सेवा का संकल्प लिया।

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3. प्रभु श्री राम से मिलन और मित्रता

हनुमान जी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय तब शुरू हुआ जब उनकी भेंट ऋष्यमूक पर्वत पर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी से हुई। हनुमान जी ने ही राम और सुग्रीव की मित्रता कराई। यहाँ से वे भगवान राम के परम भक्त और उनके हर कार्य के सारथी बन गए।

4. सीता खोज और लंका दहन

जब माता सीता का पता लगाने की बारी आई, तब हनुमान जी ने अपनी शक्तियों को याद किया और 100 योजन का समुद्र लांघकर लंका पहुँचे। उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को सांत्वना दी, रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध किया और अंत में अपनी पूंछ से पूरी स्वर्ण लंका को जलाकर रावण के अहंकार को चकनाचूर कर दिया।

5. संजीवनी बूटी और राम-रावण युद्ध

युद्ध के दौरान जब मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी रातों-रात हिमालय से पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा लाए थे। उनकी इस वीरता ने लक्ष्मण जी के प्राण बचाए। इसके अलावा पाताल लोक में जाकर उन्होंने अहिरावण का वध किया और प्रभु राम एवं लक्ष्मण को मुक्त कराया।

6. कलयुग के जाग्रत देवता (अमरता)

रामायण के अंत में जब प्रभु राम वैकुंठ जाने लगे, तब उन्होंने हनुमान जी को पृथ्वी पर ही रहकर धर्म की रक्षा करने का आदेश दिया। माता सीता ने उन्हें 'अजर-अमर' होने का वरदान दिया था। यही कारण है कि हनुमान जी को कलयुग का सबसे जाग्रत देवता माना जाता है, जो आज भी अपने भक्तों के संकट दूर करने के लिए उपस्थित रहते हैं।

हनुमान जी के जीवन से सीख

  • निस्वार्थ सेवा: बिना किसी स्वार्थ के समर्पण।
  • अथाह साहस: असंभव कार्य को भी संभव बनाने की शक्ति।
  • बुद्धि और चातुर्य: बल के साथ बुद्धि का सही संतुलन।
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