हनुमान जन्मोत्सव: अंजनी पुत्र के जन्म की अलौकिक कथा और अनसुने रहस्य

हनुमान जी का जन्म: माता अंजनी और पवन देव की कथा

अंजनी पुत्र हनुमान के प्राकट्य का दिव्य दृश्य

हिंदू धर्म के अनुसार, हनुमान जी शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं। उनके जन्म की कथा जितनी अलौकिक है, उतनी ही प्रेरणादायक भी। आइए जानते हैं कैसे पवन देव के माध्यम से माता अंजनी की कोख से संकटमोचन का प्राकट्य हुआ।

हनुमान जी के जन्म की पौराणिक कथा

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, त्रेतायुग में अंजना नाम की एक अप्सरा थी, जिन्हें एक ऋषि के श्राप के कारण वानर रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा था। उनका विवाह वानर राज केसरी से हुआ। माता अंजनी ने पुत्र प्राप्ति के लिए मतंग ऋषि के निर्देश पर भगवान शिव की घोर तपस्या की।

उसी समय, अयोध्या के राजा दशरथ संतान प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ से प्राप्त दिव्य खीर का एक भाग एक चील लेकर उड़ गई। भगवान शिव की इच्छा से पवन देव ने उस खीर के अंश को तपस्यारत माता अंजनी की अंजलि में गिरा दिया। माता ने उसे शिव का प्रसाद मानकर ग्रहण कर लिया और इसी के फलस्वरूप चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ।

पवन देव और हनुमान जी का संबंध

पवन देव ने न केवल खीर का अंश माता अंजनी तक पहुँचाया, बल्कि उन्होंने बालक हनुमान को अपनी शक्ति और गति का वरदान भी दिया। यही कारण है कि हनुमान जी को 'पवनपुत्र' और 'मारुति' के नाम से जाना जाता है।

बाल्यकाल और अजेय शक्तियाँ

हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली और चंचल थे। एक बार उन्होंने सूर्य देव को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया। जब देवराज इंद्र ने उन्हें रोकने के लिए वज्र से प्रहार किया, तो वे मूर्छित हो गए। इससे क्रोधित होकर पवन देव ने ब्रह्मांड की वायु रोक दी।

सृष्टि को बचाने के लिए सभी देवताओं ने हनुमान जी को दिव्य शक्तियाँ प्रदान कीं:

  • ब्रह्मा जी: उन्होंने हनुमान जी को अजेय होने और किसी भी अस्त्र से न मरने का वरदान दिया।
  • सूर्य देव: उन्होंने अपना तेज प्रदान किया और हनुमान जी के गुरु बने।
  • यमराज: उन्होंने हनुमान जी को काल के दंड से मुक्त कर दिया।
  • कुबेर और वरुण: उन्होंने अजेय गदा और जल से सुरक्षित रहने की शक्ति दी।

हनुमान जी के 12 दिव्य नाम और उनका महत्व

हनुमान जी की स्तुति में उनके 12 नामों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

नाम महत्व
हनुमानजिनकी हनु (ठोड़ी) वज्र से टूटी हो।
अंजनीपुत्रमाता अंजनी के लाडले।
वायुपुत्रवायु के समान गति वाले।
महाबलअसीम शक्ति के स्वामी।

निष्कर्ष: हनुमान जी का जन्म अधर्म के नाश और राम कार्य को सिद्ध करने के लिए हुआ था। वे आज भी कलयुग में साक्षात विराजमान हैं और अपने भक्तों के सभी संकट हर लेते हैं।

॥ जय श्री राम ॥
॥ जय पवनपुत्र हनुमान ॥
Home Chalisa Mandir Menu